बुधवार, 10 दिसंबर 2008

"इक याद का तोहफा"

  • आज इक याद ने तोहफा दिया मुझको
  • फिर उसकी दोस्ती का भरम दिया मुझको,
  • कभी जो जख्म मिलें थे उससे तमगों की तरह
  • फिर उसमे कमियों ने दर्द दिया मुझको,
  • इक अहसान इस याद का फिर भी रहा
  • पिछले दर्द की दवा मिलीं इक दर्द से मुझको,
  • छिपाकर गम हमने हंसने की कोशिश की
  • मगर झूठी हँसी ने सिर्फ़ आंसू दिया मुझको,
  • वक्त का क्या पता कब साथ मेरा छोड़ दे
  • काश इक बार वो फिर साथ मिलता मुझको,
  • तन्हाई जब भी बढ़ी यादों की खिड़की खोल दी मैंने
  • जहाँ मिल भी जाती दोस्ती की सादगी मुझको,
  • उम्र के रास्ते पर चलते गए अब हम
  • गुजरे हुए मील के पत्थर दिखते गए मुझको,
  • वक्त दबे पावों जायें और आँखे मीचें उसकी
  • शायद वो मेरे स्वर-शब्दों से पहचाने मुझको,
  • बड़ी मुश्किल है अब मेरी बागबाँ से उसकी दोस्ती चलना
  • है इबादत का सिला ये तो कबूल नही मुझको,
  • दोस्त जाकर उससे कहना कि उसे भूल गए हम भी
  • गौर से देखना आँखों से क्या कहता है वो मुझको !!
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