शनिवार, 25 अक्तूबर 2008

"जीवन की कविता"

याद आई खुद की तो कविता लिख लीं
जिंदगी के खोये लमहों से लौटा तो कविता लिख ली
कविता ने ही खुशी का पैगाम भेजा
मेंने भी इससे मुस्कुराहट कबूल कर लीं
मुस्कुराहट में दोस्तों को खुशी का अहसास कराया
सबकी खुशी में खुद की कमी महसूस कर लीं
न है तमन्ना अब रातों में खो जाने की
बस प्यारी यादों में नींदे तबाह कर लीं
जिंदगी के रिश्तों से कोई शिकवा ही नही
देखो मेने एक रिश्ते की निबाह कर लीं !!
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