बुधवार, 25 मार्च 2009

"जीवन की परिभाषा है"

जीवन की परिभाषा है
कुछ सोची, कुछ आशा है
है जीवन में क्या कुछ सोचों
कुछ अधूरे किस्से, कुछ पाने की आशा है,

कहाँ ठहर गए सब किस्से
कहाँ रुके हैं सब अब भी
खोना था जो, वो खो बैठे
अब तो बस पाने की आशा है।

दुनिया बहुत बड़ी है मित्रो
आँखों में ये न समाएगी,
करना होगा फतेह जीवन को
होगी फिर दुनिया भी परिचित
फिर कहता हूँ मै देखो
जीवन की परिभाषा है
कुछ सोची, कुछ आशा है !!
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