शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008

"संकल्प"

हम तो हैं राही
जिंदगी के सफर के,
साथ बढ़ रहा जो
कदम दर कदम हमारें
वो है हमसफ़र हमारा
हम हैं हमराहीं उसके,
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सपनों के पथ पर
बढ़ चलें इक साथ हम अब,
हैं दुनिया फतेह करने का इरादा
जिंदगी के सफर में,

बन पथिक हम
राह पर निकलें अब हैं,
मंजिल पाने की चाह
दौडें अब हैं,

न रुकेंगी अब
ये जीत का सिलसिला,
अब तो करना हैं बस
हमें ही फैसला,
पाकें मंजिल भी
हमें हैं नहीं रुकना,
हैं आगे और भी मंजिल
हैं आगे और भी बढ़ना!!
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