मंगलवार, 9 जुलाई 2013

वो माँ है...

खुद अपने में ही रखकर
जो हमें दुनिया में लाया करती है,
वो माँ है।

अबूझ शब्द जो समझकर
भूख-प्यास मिटाया करती है,
वो माँ है।

खुद अपने कदमो में गिरकर
जो चलना सिखाया करती है,
वो माँ है।

जो अपने सपने खोकर
हमारे सपने पूरा किया करती है,
वो माँ है।

तनहाई के तकलीफ़ो में रहकर
जो हमारी दुनिया बसाया करती है,
वो माँ है।

जो अपनो से दुत्कार खाकर
बच्चो को आशीष दिया करती है,
वो माँ है।

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