शनिवार, 16 मई 2009

"जागरुक मतदाता, उभरता लोकतंत्र..."

वर्तमान चुनाव के परिणाम को देखकर एक संतोषजनक स्थिति उत्पन्न होती है मजबूत पार्टी के रूप में तो मतदाताओ ने कांग्रेश को प्रस्तुत किया है लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में मजबूत नेता को अभी आना बाकी है इस बार के चुनाव में मतदाताओ ने अत्यधिक अवसरवादियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जो की निर्णायक सरकार के बनने का भी सफल मार्ग है
उत्तर प्रदेश में कांग्रेश की बढती सीटों को देखकर यह प्रतीत हो रहा है की यहाँ की जनता अब समप्रदायिकता से उबरकर शान्ति चाहती है, बेरोजगारी भत्ता की जगह रोजगार की गारंटी चाहती है, जातिवाद के सोशल इन्जीनरिंग से निकल कर देश की प्रगति एवं कुशल प्रशासन चाहती है
उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट के मतदाताओ के एक विशेष वर्ग ने एक बाहुबली पर एक विद्वान नेता मुरली मनोहर जोशी को जीत दिलाकर, साथ ही तमिलनाडु के शिवगंगा लोक सभा सीट पर बहुत ही करीबी और रोमांचकारी मुकाबले में देश के वर्तमान गृहमंत्री एवं एक कुशल नेता पी. चिदम्बरम को जीत दिलाकर संतुष्टि दी है
बिहार में ..यू . के प्रदर्शन और नीतिश कुमार के स्पष्ट बयान आने से एवं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेश की विजयी सीटों की संख्या और ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षा को देखते हुए रेलवे मंत्रालय एक बार फ़िर पश्चिम बंगाल या बिहार की पटरी पर दौड़ती हुयी प्रतीत होती है ये तो बस अनुमान लगाये जा रहें हैं, अभी तो मंत्रिमंडल का आखिरी स्वरुप आना बाकी है
भारत की जनता निर्णायक सरकार के रूप एक सर्वश्रेष्ठ मंत्रिमंडल को देखना चाहती है जिसमे वर्तमान के असफल मंत्रियों और अवसर वादियों की झलक दिखलाई दे
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