शनिवार, 29 अगस्त 2009

"जब भी ये मन उदास होता है..."

इस रचना को मैंने कुछ दिन पहले लिखा था। परन्तु कुछ कारणों वश उसे तब नही दे पाया था। इसे मैंने तब लिखा था, जब किसी अपने के कारण मुझे कुछ दुःख पहुँचा था और इत्तेफाक देखिये उस बार फ़िर मै अकेला ही था। उसी समय जो भावनाएं निकली उन्हें पन्ने पर दर्ज कर दिया और आज उन्ही एहसासो को आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ...
जब भी ये दिल उदास होता है
कोई न जाने मुझे क्या रास होता है
मुस्कराते है हम भी
जब किसी का साथ होता है,
लगता है वो छलावा
पर करें भी हम क्या
जब दिल उदास होता है।
रहते थे तनहा
फ़िर रह गए तनहा
क्यों हुआ ये
बस यहीं सवाल होता है,
रोक ले हम किसी को कैसे
तनहाई खोने की चाहत में
वो ख़ुद से न जब
मेरे पास होता है।
होते है जीवन के
कुछ ऐसे पहलू भी
जिन्हें फ़िर से
जीने की चाह होती है,
इसी कसक में
इक गम साथ होता है
तभी ये दिल उदास होता है!!
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